देश की स्कूली शिक्षा से जुड़ी एनसीईआरटी की एक पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका पर आधारित अध्याय को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बीच केंद्र सरकार ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्रालय ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मंत्रालय ने दोनों विभागों से कहा है कि वापस ली जा चुकी इस पाठ्यपुस्तक या उसके विवादित संस्करण का प्रसार डिजिटल प्लेटफॉर्म, वेबसाइटों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर तत्काल रोका जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हटाई गई सामग्री छात्रों या आम लोगों तक आगे न पहुंचे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा से जुड़े विषयों में केवल तथ्यात्मक और संतुलित सामग्री ही उपलब्ध कराई जाएगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और कड़ी की जाएगी।
एनसीईआरटी निदेशक के जांच के आदेश
पुस्तक की सामग्री पर सवाल उठने के बाद पूरे मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। एनसीईआरटी के निदेशक ने पाठ्यपुस्तक तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि त्रुटि किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
इस जांच का उद्देश्य केवल गलती चिन्हित करना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी अनुचित सामग्री को पूरी तरह रोकना है। निदेशक संपादन, समीक्षा और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जांच सख्ती से की जाएगी और जिम्मेदार व्यक्तियों या प्रक्रियाओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।
धर्मेंद्र प्रधान का सख्त संदेश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों की पाठ्यपुस्तकों में किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक सामग्री स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने दोहराया कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता को लेकर पूरी तरह गंभीर है। प्रधान ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों तक सही और संतुलित जानकारी पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मामला सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी शिक्षा सामग्री में संस्थाओं के प्रति संतुलित और जिम्मेदार प्रस्तुति की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि स्कूली पाठ्यपुस्तकें छात्रों की सोच को प्रभावित करती हैं, इसलिए उनमें तथ्यात्मक सटीकता और संवेदनशीलता अत्यंत जरूरी है। कोर्ट ने संकेत दिया कि शैक्षणिक सामग्री तैयार करते समय संस्थागत गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
यह विवाद तब शुरू हुआ जब नई एनसीईआरटी पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय के कुछ हिस्सों पर शिक्षकों और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। आरोप था कि सामग्री के कुछ अंश अनुचित संदर्भ में प्रस्तुत किए गए हैं। इसके बाद मामला तेजी से सार्वजनिक चर्चा में आया और शिक्षा जगत के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी बहस छिड़ गई। शिकायतें मिलने पर एनसीईआरटी ने पहले आंतरिक समीक्षा शुरू की और अब औपचारिक जांच प्रक्रिया जारी है।







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