अनिवार्यता का असली
31 मार्च 2010 की अधिसूचना के पैरा 750(अ) में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि “RTE Act 2009 की उप-धारा (1) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए केंद्र सरकार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को ऐसे शैक्षिक प्राधिकरण के रूप में अधिकृत करती है जो शिक्षक के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए पात्र व्यक्ति की न्यूनतम योग्यताएँ निर्धारित करेगा।”
यानी इस अधिसूचना से साफ होता है कि NCTE को RTE Act के अंतर्गत भविष्य में होने वाली शिक्षक भर्तियों के लिए नियम और न्यूनतम योग्यताएँ तय करने का अधिकार दिया गया था, न कि पहले से कार्यरत शिक्षकों के बने रहने की शर्तें तय करने के लिए।
📌 नोट: जब आप किसी अनुभवी विधिवेत्ता (कानूनी विशेषज्ञ) से इस विषय पर चर्चा करेंगे तो वे बताएँगे कि “शिक्षक नियुक्त किए जाने के लिए” और “शिक्षक बने रहने के लिए” — इन दोनों शब्दों के अर्थ और कानूनी प्रभाव में बड़ा अंतर होता है।
कानून की व्याख्या करते समय यदि किसी प्रावधान को लेकर अस्पष्टता या विवाद उत्पन्न होता है, तो न्यायालय आमतौर पर उस कानून के मूल उद्देश्य (Objective/Motive) को समझने का प्रयास करता है।
इसी संदर्भ में 31 मार्च 2010 की अधिसूचना का उद्देश्य भी स्पष्ट है कि RTE Act के तहत भविष्य में होने वाली शिक्षक भर्तियों के नियम और योग्यताओं को निर्धारित करने के लिए ही NCTE को अधिकृत किया गया था।













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