“एक जीत से मंज़िल पूरी नहीं होती…”: सोनम वांगचुक ने कहा—रिहाई के बाद भी जारी रहेगा संघर्ष

“एक जीत से मंज़िल पूरी नहीं होती…”: सोनम वांगचुक ने कहा—रिहाई के बाद भी जारी रहेगा संघर्ष

लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी रिहाई के बाद दिया गया बयान है। केंद्र सरकार द्वारा उनके ऊपर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को हटाने के फैसले के बाद उन्हें राजस्थान की जोधपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद वांगचुक ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है और उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है।

सोनम वांगचुक ने कहा कि वह अब अच्छा महसूस कर रहे हैं और उन्होंने अपनी आवाज को फिर से पाने और खुद को नई दिशा देने की बात कही। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि “मेरे लिए एक जीत काफी नहीं थी।” उनका मानना है कि अगर उनकी रिहाई को ही जीत माना जाए, तो यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता होगी, जिसका कोई बड़ा मतलब नहीं है। उनके अनुसार असली जीत तब होगी जब लद्दाख और हिमालय से जुड़े मुद्दों का समाधान होगा।

वांगचुक ने अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह हमेशा “विन-विन” समाधान की तलाश में रहते हैं। उनका कहना है कि किसी भी संघर्ष का परिणाम ऐसा होना चाहिए जिसमें सभी पक्षों को फायदा मिले। उन्होंने कहा कि अगर लद्दाख, हिमालय और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे नहीं सुलझते, तो उनकी व्यक्तिगत जीत का कोई महत्व नहीं रह जाता। यही कारण है कि वह अपने आंदोलन को केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय संदर्भ में देखते हैं।

सरकार के हालिया कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह भरोसा बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इससे सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सार्थक बातचीत का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे “विन-विन-विन” स्थिति बताया, जिसमें जनता, सरकार और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि—तीनों को लाभ हो सकता है।

इसके साथ ही वांगचुक ने न्यायपालिका से भी उम्मीद जताई कि अदालत इस मामले में सिर्फ आदेश रद्द करने तक सीमित न रहे, बल्कि एक स्पष्ट निर्णय भी दे, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम जैसे कानूनों का सही और जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल हो सके।

गौरतलब है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 2025 में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान हिंसा भी हुई, जिसमें कई लोगों की जान गई और कई घायल हुए। इसके बाद सोनम वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था।

कुल मिलाकर, सोनम वांगचुक की रिहाई भले ही एक महत्वपूर्ण पड़ाव हो, लेकिन उनके लिए यह संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। उनका मुख्य लक्ष्य अब भी लद्दाख, हिमालय और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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