देश के कई बड़े शहरों, जैसे मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में यह समस्या काफी गंभीर हो गई है। वहां के होटल और रेस्टोरेंट मालिक सिलेंडर की डिलीवरी में देरी और कमी की शिकायत कर रहे हैं। वे बता रहे हैं कि समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से उनके किचन का काम प्रभावित हो रहा है और ग्राहकों को भी परेशानी हो रही है।
रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि पहले सिलेंडर 1-2 दिन में मिल जाता था, लेकिन अब कई जगहों पर 4-5 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस वजह से कई छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों को अस्थायी रूप से अपनी सेवा धीमी करनी पड़ती है। कुछ होटल मालिकों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है ताकि ग्राहक किसी परेशानी का सामना न करें।
होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री चिंतित है। उनका कहना है कि अगर गैस की आपूर्ति में यही स्थिति बनी रहे, तो आने वाले दिनों में खाने-पीने के कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा। कई बड़े रेस्टोरेंट चेन और छोटे होटल मालिकों ने सरकार और गैस कंपनियों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि गैस की कमी का असर सिर्फ होटल इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा। यदि सप्लाई की समस्या लम्बे समय तक चलती है, तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
इसके असर के पीछे एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की समस्याएं हैं। मध्य पूर्व क्षेत्र में चल रहे तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में की गई प्रतिबंधों के कारण कई देशों में गैस और तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
भारत में एलपीजी की सप्लाई मुख्य रूप से बड़ी गैस कंपनियों के माध्यम से होती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है। इसलिए इन दिनों कई शहरों में सब्सिडी की उपलब्धता में कमी आई है।
केंद्र सरकार और गैस कंपनियों ने इस मामले पर स्थिति को नज़र में रखने का भरोसा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में लॉजिस्टिक समस्याओं के चलते डिलीवरी में देरी हुई है, लेकिन इसे जल्द ठीक किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पहले प्राथमिकता मिल रही है ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। हालांकि, होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री का कहना है कि उनकी भी नियमित सप्लाई होनी चाहिए, क्योंकि उनका कारोबार पूरी तरह गैस पर निर्भर है।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे होटल, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर पड़ रहा है। इन व्यवसायों के पास गैस का ज्यादा स्टॉक रखने की सुविधा नहीं होती। इस वजह से सप्लाई में थोड़ी सी भी देरी उनके काम को प्रभावित करती है।
कई छोटे बिजनेस बताते हैं कि उन्हें महंगे दामों पर पेट्रोल खरीदना पड़ रहे हैं, जिससे उनका खर्च बढ़ गया है। यदि यही हालत लंबे समय तक बने रहते हैं, तो कई छोटे व्यवसायों के लिए अपना व्यवसाय चलाना मुश्किल हो सकता है।
होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार और गैस कंपनियां जल्दी ही इस समस्या का समाधान निकालेगी। ठेकेदार का कहना है कि यदि सप्लाई चेन को मजबूत किया जाए और लॉजिस्टिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, तो ऐसी समस्याओं का आसानी से समाधान किया जा सकता है।
अगर, कई शहरों के होटल मालिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इसका असर होटल इंडस्ट्री और आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा।















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