20 लाख बैरल तेल से लदा टैंकर होर्मुज में भटका, ईरान देखता रह गया

20 लाख बैरल तेल से लदा टैंकर

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजरें लगातार तेल टैंकरों की आवाजाही पर टिकी हुई हैं। इसी बीच तीन बड़े तेल टैंकरों ने तमाम खतरों और निगरानी के बावजूद सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया। इन टैंकरों ने ईरानी हमलों और संभावित रोकथाम से बचने के लिए बेहद चतुर रणनीति अपनाई। सबसे दिलचस्प मामला उस टैंकर का रहा जिसे ईरानी सेना ने कम से कम दो बार वापस लौटने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन तीसरी कोशिश में वह अपना रास्ता बनाने में कामयाब हो गया।

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में बदल गया है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करता है। हाल के दिनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण कई तेल कंपनियां और शिपिंग ऑपरेटर्स सतर्क हो गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चा तेल लेकर जा रहे तीन टैंकरों ने पिछले हफ्ते और रविवार के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पार किया। इन जहाजों ने अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए एक खास तरीका अपनाया। उन्होंने अपने AIS ट्रैकर्स यानी ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को बंद कर दिया था। यह वही सिस्टम होता है जिसके जरिए किसी जहाज की लोकेशन, दिशा और गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। ट्रैकर्स बंद होने के बाद ये टैंकर कुछ समय के लिए समुद्र में पूरी तरह ‘गायब’ हो गए थे।

शिपिंग डेटा एनालिटिक्स कंपनियों केप्लर और LSEG (लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप) की सोमवार को सामने आई रिपोर्ट में इस पूरे ऑपरेशन का खुलासा हुआ। डेटा के अनुसार, इन टैंकरों ने बेहद सावधानी के साथ अपनी यात्रा पूरी की और ईरानी निगरानी से बचते हुए सुरक्षित तरीके से आगे निकल गए। इससे यह भी साफ हुआ कि मौजूदा हालात में तेल कंपनियां और जहाज ऑपरेटर्स सुरक्षा के लिए असामान्य तरीके अपनाने को मजबूर हैं।

सबसे ज्यादा ध्यान उस तेल टैंकर पर गया जिसे ईरानी बलों ने दो बार रोकने की कोशिश की थी। हालांकि तीसरी बार टैंकर ने नई रणनीति अपनाई और अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर होर्मुज स्ट्रेट पार करने में सफल रहा। ट्रैकर्स बंद होने की वजह से जहाज की सटीक लोकेशन का पता लगाना बेहद कठिन हो गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के कदम सुरक्षा नियमों के लिहाज से जोखिम भरे माने जाते हैं, लेकिन मौजूदा तनावपूर्ण हालात में कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा को लेकर असाधारण तरीके अपना रही हैं।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी रास्ते से होता है। यही वजह है कि यहां किसी भी प्रकार का संघर्ष या सैन्य कार्रवाई वैश्विक तेल कीमतों को तुरंत प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज में तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। पहले ही कई शिपिंग कंपनियां इस रूट को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम कर रही हैं। कुछ कंपनियां वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं, जबकि कई जहाज अपनी लोकेशन छिपाकर सफर करने की रणनीति अपना रहे हैं।

हालांकि, समुद्री कानूनों के तहत लंबे समय तक ट्रैकर्स बंद रखना सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे टकराव या दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। बावजूद इसके, हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कई जहाज ऑपरेटर्स जोखिम उठाने को तैयार हैं। तेल बाजार से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर और ज्यादा बनी रहेगी।

फिलहाल तीनों टैंकरों के सुरक्षित तरीके से होर्मुज पार कर लेने से तेल बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव अभी भी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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