बहस के दौरान दिया बयान
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव कुंवर ने न्यूज़ चैनल पर एक बहस के दौरान विश्वविद्यालय में हो रही नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकांश कॉलेजों में वाइस चांसलर की नियुक्ति एक विशेष विचारधारा से जुड़े लोगों की हो रही है।
वाइस चांसलर नियुक्ति पर आरोप
प्रोफेसर राजीव कुंवर के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय के एक-दो कॉलेजों को छोड़कर कई संस्थानों में ऐसे लोगों को वाइस चांसलर बनाया गया है जो आरएसएस और बीजेपी समर्थक माने जाते हैं।
प्रिंसिपल और प्रोफेसर नियुक्ति पर भी सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि केवल वाइस चांसलर ही नहीं, बल्कि कई कॉलेजों में प्रिंसिपल और प्रोफेसर के पदों पर भी उन्हीं लोगों की नियुक्ति हो रही है जो बीजेपी और आरएसएस के करीब माने जाते हैं।
कार्यक्रमों में दिखने की बात
प्रोफेसर कुंवर का कहना था कि कई प्रिंसिपल ऐसे कार्यक्रमों में दिखाई देते हैं जहाँ आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक मौजूद रहते हैं। इससे विश्वविद्यालय की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं।
जातीय प्रतिनिधित्व पर चिंता
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विश्वविद्यालयों के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियाँ कुछ खास जातियों से हो रही हैं, जिससे सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
विविधता रिपोर्ट की मांग
प्रोफेसर कुंवर ने सुझाव दिया कि भारत में हर साल विभिन्न क्षेत्रों में विविधता (Diversity) रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य कर दिया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्णय लेने वाले पदों पर किन वर्गों और समुदायों का प्रतिनिधित्व है।
सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा
उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी, जिसमें OBC, SC और ST समुदाय शामिल हैं, को अक्सर यह जानकारी नहीं मिल पाती कि महत्वपूर्ण पदों पर किन जातियों या समूहों का वर्चस्व है।















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