तमिलनाडु में ‘थलापति’ युग का उदय: विजय ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, द्रविड़ राजनीति के दशकों पुराने वर्चस्व का अंत
तमिलनाडु की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। सिनेमाई पर्दे पर दशकों तक राज करने वाले ‘थलापति’ यानी सी. जोसेफ़ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर सत्ता की कमान संभाल ली है। इस शपथ ग्रहण के साथ ही राज्य की सियासत में पिछले कई दशकों से चले आ रहे दो प्रमुख द्रविड़ दलों—द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK)—के द्विपक्षीय वर्चस्व का अंत हो गया है। विजय की इस जीत को राज्य में एक बड़े वैचारिक और राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
मंच से ही ‘एक्शन’ में दिखे मुख्यमंत्री विजय
चेन्नई में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल ने विजय को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। विजय के साथ नौ अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। लेकिन जो बात इस समारोह में सबसे अलग रही, वह था विजय का काम करने का अंदाज़। शपथ लेने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री विजय ने औपचारिक दफ्तर जाने का इंतज़ार नहीं किया, बल्कि शपथ ग्रहण स्थल (मंच) से ही अपने पहले तीन प्रमुख आदेश जारी कर दिए।
उनके इन फैसलों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार का मुख्य एजेंडा जनकल्याण और सुरक्षा है।
पहली कलम: मुफ्त बिजली का उपहार
मुख्यमंत्री के रूप में विजय ने अपनी पहली फ़ाइल पर हस्ताक्षर करते हुए तमिलनाडु के सभी घरों को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का आदेश दिया। यह उनके चुनावी वादों में सबसे प्रमुख था और इसे मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर कड़ा प्रहार
बिजली के बाद, विजय ने राज्य की दो सबसे संवेदनशील समस्याओं—नशा और सुरक्षा—पर प्रहार किया:
- एंटी-ड्रग स्पेशल फोर्स: मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए उन्होंने हर जिले में एक ‘स्पेशल फोर्स’ के गठन का आदेश दिया।
- ‘लायनेस’ टास्क फोर्स: महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने ‘लायनेस’ (Lioness) नामक एक विशेष कार्य बल की स्थापना की घोषणा की, जो विशेष रूप से महिला सुरक्षा और अपराधों के त्वरित निस्तारण पर काम करेगी।
राजनीतिक समीकरण: कांग्रेस का साथ और राहुल गांधी की मौजूदगी
विजय की पार्टी, तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK), अपने दम पर बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुँच पाई थी। ऐसे में राज्य के राजनीतिक समीकरण तब बदल गए जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपना वर्षों पुराना गठबंधन डीएमके (DMK) से तोड़ दिया। कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों का समर्थन टीवीके को देकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई।
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी की उपस्थिति ने इस नए गठबंधन की मजबूती को रेखांकित किया। राहुल गांधी ने विजय को बधाई देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा:
“तमिलनाडु ने एक नई पीढ़ी, एक नई आवाज़ और एक नई सोच को चुन लिया है। विजय को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मुझे विश्वास है कि वे तमिलनाडु के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करेंगे।”
द्रविड़ राजनीति के एक युग का समापन
पिछले 50 से अधिक वर्षों से तमिलनाडु की सत्ता या तो करुणानिधि परिवार (DMK) के पास रही या एमजीआर और जयललिता (AIADMK) के पास। विजय का उदय न केवल एक सुपरस्टार का राजनीतिक उदय है, बल्कि यह उस द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक ढांचे को भी चुनौती है जिसने लंबे समय से राज्य को नियंत्रित किया था।
विजय ने अपने भाषणों में अक्सर ‘जाति और धर्म से ऊपर’ राजनीति की बात की है, जिसे युवाओं का भारी समर्थन मिला है। राहुल गांधी के शब्दों में “नई सोच” का मतलब इसी बदलाव से है, जहाँ लोग अब पारंपरिक नारों से हटकर आधुनिक और पारदर्शी शासन की ओर देख रहे हैं।
चुनौतियां और भविष्य की राह
भले ही विजय ने धमाकेदार शुरुआत की है, लेकिन उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ है। गठबंधन सरकार को चलाना, राज्य की वित्तीय स्थिति को संभालते हुए मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं को लागू करना और अनुभवी विपक्षी दलों के हमलों का सामना करना उनके लिए एक कड़ी परीक्षा होगी।
फिलहाल, तमिलनाडु की सड़कों पर जश्न का माहौल है। प्रशंसकों के लिए वह अब केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि उनके भविष्य के ‘रक्षक’ के रूप में उभरे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय अपनी ‘रील लाइफ’ की तरह ‘रियल लाइफ’ की चुनौतियों को कितनी कुशलता से सुलझाते हैं।















Leave a Reply