तमिलनाडु राजनीति: विजय की पार्टी को न्योता न मिलने पर राज्यपाल का बड़ा बयान

विजय की पार्टी को न्योता न मिलने पर राज्यपाल का बड़ा बयान

तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। अभिनेता और तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय की पार्टी ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे ज्यादा सीटें हासिल कीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला। अब इस पूरे मामले पर तमिलनाडु राजभवन की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की गई है।

राजभवन ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि टीवीके अभी तक विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में सफल नहीं हुई है। इसी कारण राज्यपाल ने पार्टी को सरकार गठन के लिए आमंत्रित नहीं किया।

बयान के अनुसार, तमिलनाडु के राज्यपाल थिरु राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 7 मई को टीवीके अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय को चेन्नई स्थित लोक भवन में बुलाया था। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सरकार गठन और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई। राज्यपाल ने विजय को स्पष्ट रूप से बताया कि सरकार बनाने के लिए विधानसभा में बहुमत का समर्थन होना जरूरी है, जो फिलहाल टीवीके के पास नहीं है।

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को कम से कम 118 विधायकों का समर्थन चाहिए। चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। यही वजह है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल ने पार्टी को सरकार गठन का निमंत्रण नहीं दिया।

इस चुनाव में टीवीके ने राज्य की पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों को बड़ा झटका दिया। लंबे समय से तमिल राजनीति में प्रभाव रखने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और अन्य क्षेत्रीय दलों के मुकाबले विजय की पार्टी ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की। चुनाव परिणामों ने यह साफ संकेत दिया कि राज्य की राजनीति में एक नई ताकत उभर रही है।

हालांकि, सरकार बनाने के लिए केवल सबसे बड़ी पार्टी होना पर्याप्त नहीं होता। संवैधानिक नियमों के अनुसार बहुमत साबित करना आवश्यक है। इसी मुद्दे पर अब तमिलनाडु में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर टीवीके समर्थन जुटा लेती है तो उसे मौका मिलना चाहिए, जबकि कुछ दलों का मानना है कि बिना स्पष्ट बहुमत के सरकार गठन अस्थिरता पैदा कर सकता है।

इस बीच कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए विजय की पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की है। कांग्रेस ने इस चुनाव में डीएमके गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और पांच सीटें जीती थीं। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में दरार सामने आई है। पिछले एक दशक से दोनों दल कई चुनावों में साथ रहे थे, लेकिन अब यह गठबंधन टूटता दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि वे तमिलनाडु में स्थिर सरकार के पक्ष में हैं और जरूरत पड़ने पर टीवीके का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस के समर्थन के बावजूद टीवीके के पास अभी भी बहुमत का आंकड़ा पूरा करने के लिए अतिरिक्त विधायकों की जरूरत पड़ सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु में जोड़तोड़ और गठबंधन की राजनीति तेज हो सकती है। कई छोटे दल और निर्दलीय विधायक सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि टीवीके आवश्यक समर्थन जुटा लेती है तो राज्यपाल दोबारा स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं।

विजय की राजनीति में एंट्री को लेकर पहले से ही तमिलनाडु में काफी चर्चा रही है। फिल्मी दुनिया में लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और बहुत कम समय में जनता के बीच मजबूत पकड़ बना ली। इस चुनाव में उनकी पार्टी का प्रदर्शन यह दिखाता है कि राज्य में पारंपरिक राजनीति के खिलाफ जनता बदलाव चाहती है।

फिलहाल तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या टीवीके बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर पाएगी या फिर राज्य में किसी नए गठबंधन की तस्वीर सामने आएगी।

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