NASA Satellite Crashing: 2012 में लॉन्च हुआ उपग्रह 2026 में वायुमंडल में लौटा

NASA Satellite Crashing: 2012 में लॉन्च हुआ उपग्रह 2026 में वायुमंडल में लौटा

अंतरिक्ष एजेंसी NASA का वैज्ञानिक उपग्रह Van Allen Probe A लगभग 14 वर्षों तक पृथ्वी की कक्षा में रहने के बाद 11 मार्च 2026 को पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गया।

2012 में हुआ था लॉन्च

इस उपग्रह को 30 अगस्त 2012 को लॉन्च किया गया था। यह “Van Allen Probes” मिशन का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य पृथ्वी के आसपास मौजूद Van Allen radiation belts का अध्ययन करना था।

2019 में समाप्त हुआ मिशन

यह मिशन शुरुआत में लगभग दो वर्षों के लिए बनाया गया था, लेकिन उपग्रह ने अपेक्षा से अधिक समय तक काम किया। बाद में 2019 में मिशन को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया, हालांकि उपग्रह कक्षा में घूमता रहा।

वायुमंडल में पुनः प्रवेश

लगभग 14 साल अंतरिक्ष में रहने के बाद 11 मार्च 2026 को यह उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश कर गया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना पूर्वी प्रशांत महासागर (Eastern Pacific Ocean) के ऊपर दर्ज की गई।

अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में नष्ट

वायुमंडल में प्रवेश के दौरान तेज गति और अत्यधिक तापमान के कारण उपग्रह का अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो गया।

जोखिम बहुत कम

विशेषज्ञों के अनुसार इस घटना से लोगों के लिए जोखिम बहुत कम था। वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में सूर्य की बढ़ी हुई गतिविधि के कारण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में बदलाव आया, जिससे उपग्रह की कक्षा धीरे-धीरे कम होती गई और वह अपेक्षित समय से पहले वायुमंडल में लौट आया

NASA Satellite Crashing: 2012 में लॉन्च हुआ उपग्रह 2026 में वायुमंडल में लौटा

NASA Satellite Crashing News: अंतरिक्ष एजेंसी NASA का वैज्ञानिक उपग्रह Van Allen Probe A लगभग 14 साल तक पृथ्वी की कक्षा में रहने के बाद मार्च 2026 में पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश कर गया। इस उपग्रह को 2012 में पृथ्वी के आसपास मौजूद रेडिएशन बेल्ट का अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया था।

2012 में लॉन्च हुआ था यह उपग्रह

Van Allen Probe A को 30 अगस्त 2012 को लॉन्च किया गया था। यह “Van Allen Probes” मिशन का हिस्सा था, जिसके तहत दो उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए थे। इनका उद्देश्य पृथ्वी के चारों ओर मौजूद Van Allen radiation belts का अध्ययन करना था।

ये रेडिएशन बेल्ट ऊर्जावान कणों का क्षेत्र होते हैं जो पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से जुड़े रहते हैं। वैज्ञानिकों के लिए इनका अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इनका प्रभाव अंतरिक्ष में काम कर रहे सैटेलाइट और अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ सकता है।

मिशन का उद्देश्य

इस मिशन के जरिए वैज्ञानिक यह समझना चाहते थे कि पृथ्वी के आसपास मौजूद रेडिएशन बेल्ट कैसे बनते हैं और उनमें मौजूद कण किस तरह व्यवहार करते हैं। इस तरह की जानकारी अंतरिक्ष में मौजूद संचार उपग्रह, GPS सिस्टम और अन्य तकनीकों को सुरक्षित रखने के लिए उपयोगी मानी जाती है।

2019 में समाप्त हुआ मिशन

यह मिशन शुरुआत में लगभग दो साल के लिए बनाया गया था, लेकिन उपग्रह ने अपेक्षा से ज्यादा समय तक काम किया और वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण डेटा मिलता रहा। बाद में ईंधन कम होने और संचालन सीमित होने के कारण 2019 में इस मिशन को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया। इसके बाद Van Allen Probe A पृथ्वी की कक्षा में निष्क्रिय रूप से घूमता रहा।

2026 में वायुमंडल में पुनः प्रवेश

करीब 14 साल तक अंतरिक्ष में रहने के बाद 11 मार्च 2026 को यह उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश कर गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह घटना पूर्वी प्रशांत महासागर (Eastern Pacific Ocean) के ऊपर दर्ज की गई।

जब कोई सैटेलाइट पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है तो तेज गति और अत्यधिक तापमान के कारण उसका अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो जाता है। इस उपग्रह के साथ भी यही हुआ और इसका बड़ा हिस्सा वायुमंडल में ही नष्ट हो गया।

लोगों के लिए खतरा कितना था

विशेषज्ञों के अनुसार इस घटना से लोगों के लिए जोखिम बहुत कम था। आम तौर पर ऐसे मामलों में बचा हुआ मलबा समुद्र में गिरने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा महासागरों से ढका हुआ है।

अपेक्षा से पहले क्यों लौटा उपग्रह

वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में सूर्य की गतिविधि बढ़ने से पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में बदलाव हुआ। इससे कक्षा में मौजूद उपग्रहों पर वायुमंडलीय घर्षण बढ़ जाता है। इसी वजह से Van Allen Probe A की कक्षा धीरे-धीरे कम होती गई और वह अनुमान से पहले पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आ गया।

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