श्रीनगर/जम्मू | 30 जून 2026
अमरनाथ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने का दावा किया है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां पिछले दो दशकों से सक्रिय आतंकी नेटवर्क का अहम सहयोगी मान रही हैं। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान हाजी लतीफ के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकियों को रसद, सुरक्षित ठिकाने और अन्य सहायता उपलब्ध कराता था।
अमरनाथ यात्रा से पहले रातभर चला कठुआ ऑपरेशन
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कठुआ जिले में खुफिया सूचना के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने रातभर चलाए गए विशेष ऑपरेशन के दौरान हाजी लतीफ को गिरफ्तार किया। अधिकारियों का कहना है कि वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था और उसके खिलाफ पर्याप्त तकनीकी एवं खुफिया जानकारी जुटाई जा चुकी थी।
हाजी लतीफ पर क्या हैं आरोप?
पुलिस का दावा है कि हाजी लतीफ पिछले लगभग 20 वर्षों से सीमा पार से आने वाले आतंकियों की मदद कर रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह आतंकी सहयोगी के रूप में काम करते हुए आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने, परिवहन और स्थानीय स्तर पर रसद उपलब्ध कराता था।
अधिकारियों का आरोप है कि उसके संबंध जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकियों के साथ थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होनी बाकी है और मामले की जांच जारी है।
आतंकी नेटवर्क की जांच तेज
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हाजी लतीफ से पूछताछ के दौरान आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि पूछताछ से आतंकियों के स्थानीय संपर्कों, घुसपैठ के रास्तों और सहयोगियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इसके अन्य सदस्य अभी भी सक्रिय हैं। यदि नए सुराग मिलते हैं तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
अमरनाथ यात्रा सुरक्षा पर विशेष फोकस
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा में शामिल होते हैं। यात्रा शुरू होने से पहले अमरनाथ यात्रा सुरक्षा को लेकर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन व्यापक इंतजाम करता है।
इस वर्ष भी संवेदनशील इलाकों में सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी कैमरे, हाईवे चेकिंग, बम निरोधक दस्ते और आधुनिक निगरानी उपकरणों के जरिए पूरे यात्रा मार्ग पर नजर रखी जा रही है।
आतंकवाद विरोधी अभियान जारी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आतंकी सहयोगी और स्थानीय OGW नेटवर्क को खत्म करना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी मॉड्यूल और कथित ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली रसद और सहायता को समाप्त करना आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का अहम हिस्सा है।
जांच अभी जारी
फिलहाल हाजी लतीफ गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। यदि पूछताछ में नए तथ्य सामने आते हैं तो इस मामले में अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
निष्कर्ष
अमरनाथ यात्रा से पहले हुई यह कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से संभावित आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। वहीं सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित आतंकी नेटवर्क कितना व्यापक था और क्या इससे जुड़े अन्य लोग अभी भी सक्रिय हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट पुलिस और मीडिया में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। लेख में वर्णित आरोप जांच एजेंसियों के दावे हैं। इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
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